रायपुर स्मार्ट सिटी योजना: धरातल पर कितना बदला शहर और कहाँ अटकी परियोजनाएं

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत रायपुर की प्रमुख सड़कों और नागरिक सुविधाओं के विकास का जायजा। जानिए कौन से काम पूरे हुए और कहाँ जनता अब भी परेशान है।

छत्तीसगढ़

7/25/20262 min read

रायपुर को आधुनिक और व्यवस्थित स्वरूप देने के उद्देश्य से शुरू की गई स्मार्ट सिटी योजना अब अपने महत्वपूर्ण चरण में है। तेलीबांधा तालाब के सौंदर्यीकरण और मुख्य चौराहों पर स्मार्ट लाइटिंग से शहर का बाहरी स्वरूप बदला नजर आता है। हालांकि जब बात अंदरूनी बस्तियों के जल-निकासी और सीवरेज प्रबंधन की आती है, तो स्थिति आज भी गंभीर बनी हुई है।

स्मार्ट सड़कों का सच और यातायात

मुख्य मार्गों पर बिछाई गई डामर की नई परत और डिजिटल ट्रैफिक सिग्नलिंग ने मुख्य चौराहों की आवजाही को सुगम बनाया है। इसके बावजूद घनी आबादी वाले व्यापारिक इलाकों जैसे गोल बाजार और पचपेड़ी नाका पर जाम की समस्या अब भी बनी हुई है। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि केवल चौराहों का सौंदर्यीकरण काफी नहीं है, बल्कि व्यवस्थित पार्किंग स्थल बनाना बेहद जरूरी है।

नागरिक सुविधाओं का जमीनी आकलन

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण में नगर निगम ने व्यवस्थित काम किया है और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार दर्ज किया है। लेकिन कई आउटर वार्डों में सफाई कर्मचारियों की अनियमितता और खुले डंपिंग यार्ड स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। जमीनी समीक्षा से स्पष्ट होता है कि योजनाओं की वास्तविक सफलता कागजी दावों से अलग निरंतर निगरानी पर निर्भर करती है।

आगे की राह और प्रशासनिक जवाबदेही

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को वास्तविक सफलता दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को वार्ड स्तर पर जनता से सीधा संवाद बनाना होगा। केवल स्वीकृत बजट खर्च करने के स्थान पर कार्यों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।